Essay on How I Save a Drowning Child in Hindi

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Essay on How I Save a Drowning Child in Hindi

पिछले रविवार को, मैं सुबह की सैर के लिए नहर के पास बने पार्क में गया। मैंने नहर के किनारे व्यायाम करना शुरू कर दिया और अपने आस पास क्या हो रहा है, इस बारे में लापरवाह हो गया। अचानक मुझे एक महिला के रोने की आवाज सुनाई दी। मैं चौंका और नहर की ओर देखने लगा। मैंने देखा कि एक अधेड़ उम्र की महिला नहर के किनारे रो रही थी। मैं आगे की और बढ़ा तो देखा एक छोटा बच्चा नहर में डूबा रहा था ।

एक पल की हिचकिचाहट के बिना, मैं नहर में कूद गया। पानी काफी गहरा और ठंडा था। सौभाग्य से, बच्चा नहर में पड़े पत्थरों के बीच अटक गया था। मैं तैरते हुए बच्चे के पास पंहुचा और उसको अपनी बाहों में पकड़ लिया। मैंने उसे बड़ी मुश्किल से अपने कंधों पर उठाया क्योंकि उसके पेट में पानी के कारण वह काफी भारी हो गया था। किनारे पर बच्चे की मां हमारा इंतजार कर रही थी। उसने बताया की वह सुबह स्नान के लिए अपने बच्चे के साथ यहाँ आयी थी। बच्चा थोड़ा शरारती था, इधर उधर भागने लगा तो उसका पैर कीचड़ पर फिसल गया और वह सीधा नहर में गिर गया। माँ रो रही थी, “मदद करो! मदद! भगवान की खातिर, कोई मेरे बच्चे को बचा लो !” जैसे ही मैं नहर के किनारे की ओर बढ़ा, उसने मुझसे मदद की गुहार की और मैं तुरंत ही नहर में कूद गया।

बच्चे को बचा कर जैसे ही मैं नहर से बाहर आया, वह अपने बेटे को बेहोश देखकर परेशान हो गई और जोर जोर से रोने लगी। मैंने उससे कहा, ” रोओ मत, भगवान से प्रार्थना करो।” मैंने बच्चे को किनारे पर रख दिया और उसका पेट दबाने लगा। उसके पेट का सारा पानी निकल गया। महिला पहले तो घबरा गई लेकिन मैंने उसे भरोसा दिलाया कि सब ठीक हो जायेगा चिंता मत करों। मैंने सड़क पर आ रही एक लॉरी को रोका और बच्चे को निकटतम अस्पताल ले गया। डॉक्टर एक बहुत ही बुजुर्ग व्यक्ति थे जिन्होंने हमें बताया कि हम बच्चे को समय में अस्पताल ले आये थे। कुछ मिनटों की देरी से बच्चे की जान को खतरा हो सकता था।

जब तक बच्चा पूरी तरह से ठीक नहीं हो गया मैं रोज़ हॉस्पिटल जाता रहा. बच्चे की माँ ने मुझे बहुत सा आशीर्वाद दिया वह मुझे पुरस्कृत करना चाहती थी, लेकिन मैंने कहा की , “मैंने केवल अपना कर्तव्य निभाया है। ”मुझे एक अनमोल जीवन बचाने की जो संतुष्टि मिली है वो किसी भी पुरुस्कार से बड़ी हैं।

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