Essay on Combating Corruption Battling Black Money in Hindi

Here we are with Essay on Combating Corruption Battling Black Money in Hindi describing about how we can fight with corruption and black money and eliminate these two problems from our country. Read about Essay on Combating Corruption Battling Black Money in Hindi- भ्रष्टाचार व काले धन का मुकाबला कैसे कर सकते हैं.

Essay on Combating Corruption Battling Black Money in Hindi

भारत एक विकासशील राष्ट्र है, जो प्राकृतिक व अप्राकृतिक दोनों ही तरह के संसाधनों से समृद्ध है तथा विश्व में सबसे बड़े लोकतंत्र में से एक है लेकिन दुर्भाग्यवश आज भी हम भ्रष्टाचार और काले धन जैसी सामाजिक बुराइयों से जूझ रहे है। आज भ्रष्टाचार हमारे देश के लिए सबसे बड़ी समस्या बन गया है और यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम सभी किसी ना किसी तरह से इस भ्रष्ट समाज का हिस्सा हैं तथा इस कुरीति को बढ़ावा देने में सहभागी हैं। हम अक्सर घर पर सुनाते हैं की “परोपकार की भावना घर से आरंभ होती है” लेकिन क्या हम जानते हैं कि भ्रष्टाचार भी घर से शुरू होता है, जैसा कि हम अपने बच्चों से कोई भी काम करवाने के लिए उन्हें प्रोत्साहित नहीं करते बल्कि उन्हें उपहार रुपी रिश्वत का लालच देते हैं जो धीरे धीरे एक आदत में बदल जाती हैं और यह भ्रष्टाचार की ओर पहला कदम है.

भ्रष्टाचार और काला धन दीमक की तरह हैं, जो हमारे देश को अंदर ही अंदर खोखला कर रहे हैं और वह दिन बहुत दूर नहीं जब न केवल हमे हमारी बल्कि हमारी आगे आने वाली पीढ़ियों को इसके दुष्परिणाम भुगतने पड़ेंगे । आज हम बुलेट ट्रेनों, मुफ्त वाई-फाई, आधुनिक संचार उपकरणों, नवीनतम गैजेट्स और उच्च तकनीक के बारे में बात करते हैं, लेकिन क्या आज तक भी हम समाज के हर वर्ग को आधारभूत सुविधाएं प्रदान करने में सफल हुए हैं . आज भी कितने लोग दो वक्त का भोजन नहीं जुटा पाते, किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हैं, बच्चे स्कूल ना जाकर बाल मजदूरी कर रहे हैं, औरतें सुरक्षित महसूस नहीं कर पाती और भी ना जाने ऐसी कितनी समस्याएँ हैं जो हमारे तथाकथित प्रगतिशील भारत में पावं पसार रही हैं. इन सभी समस्याओं के लिए भ्रष्ट अधिकारी, राजनेता और कला बाज़ारी करने वाले सीथे तौर पर जिम्मेवार हैं, जो इन सामाजिक बुराइयों की ओर ध्यान देने के बजाय अपनी धन संचय और शक्ति की भूख को संतुष्ट करने में व्यस्त हैं। क्या हमने कभी सोचा हैं कि भ्रष्टाचार के पीछे मूल कारण क्या है यदि हम कम आय के स्तरों और उच्च खर्चों को दोषी मानते हैं तो घोटाले की सूचियां उच्च स्तर के राजनीतिज्ञ, व्यापारी और अधिकारियों के नामों से क्यों भरी हुईं हैं., वास्तविकता मिथकों की तुलना में बहुत अधिक कठोर है। भ्रष्टाचार की बुराई ने समाज के सभी वर्गों में अपना हाथ फैलाया है। कुछ लोगों अपने निजी लाभ के लिए आधिकारिक शक्तियों का दुरुपयोग करते हैं वही दूसरी ओर, ईमानदार लोग इस बुराई के खिलाफ लड़ रहे हैं.

भ्रष्टाचार और काले धन की समस्या एक ही सिक्के के दो पहलू हैं., भ्रष्टाचार के जरिये अर्जित धन ही काले धन के रूप में संचित होता है। शायद भ्रष्टाचार और काला धन जमा करना ही ऐसी दो गतिविधियां हैं जिसमें हम सभी सक्रिय रूप से भाग लेते हैं और इस पर कभी शर्म महसूस नहीं करते। आज रिश्वत देकर काम करवाना आसान लगता हैं, लेकिन अगर हमारे पास सभी दस्तावेज क्रम में हैं, हम समय पर कर चुकाते हैं, ना ही यातायात के नियमों को तोड़ते हैं तथा किसी भी प्रकार की गैरकानूनी गतिविधि का हिस्सा नहीं हैं तो हमें भ्रष्ट अधिकारियों के सामने झुकने की जरूरत ही नहीं होगी, और भी अगर कोई आपसे रिश्वत मांगता हैं तो उसकी तुरंत एंटी करप्शन ब्यूरो में रिपोर्ट करे. भ्रष्टाचार और काले धन को बढ़ाने में सबसे बड़ा योगदान पात्रता कार्यक्रमों और सामाजिक व्यय जैसी सरकारी योजनाओं का हैं जो रिश्वत और घोटालों में अरबों रुपए का निवेश सम्भव करती है। कर और लाइसेंसिंग सिस्टम, सरकारी विभागों, भूमि और संपत्ति माफिया और पारदर्शी कानूनों और प्रक्रियाओं की कमी के कारण ही सार्वजनिक क्षेत्रों में भ्रष्टाचार सबसे उच्च स्तर पर देदेखने को मिलता हैं.

हम अक्सर काले धन के बारे में सुनाते हैं, क्या हमें पता है कि काला धन क्या है और यह कहां से आता है। काले धन का अर्थ है वह संपत्ति जो पूरी तरह से वैध नहीं है या जिसे कर चोरी से जमा किया गया हैं. अपराध, नशीली दवाओं के व्यापार, आतंकवाद और भ्रष्टाचार जैसी अवैध गतिविधियों में शामिल होकर जो धन कमाया जाता हैं वह भी काला धन ही हैं. हम में से बहुत से कर चोरी के तरीको को को खोजने के लिए संघर्ष करते हैं, हालांकि उच्च कर दर और कम आय कर चोरी का प्रमुख कारण हो सकता हैं लेकिन कर चोरी इस समस्या का समाधान नहीं है। केवल आम आदमी नहीं बल्कि बड़े कॉर्पोरेट्स और औद्योगिक इकाइयां भी कर चोरी में शामिल हैं। काला धन हमारी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को बहुत बुरी तरह से नुकसान पहुंचा रहा हैं तथा अमीर गरीब के विभाजन को भी बढ़ा रहा हैं। मुद्रास्फीति के दबाव ने काले धन को जन्म दिया हैं । जब तक मुद्रास्फीति को रोकने के लिए कुछ कठोर उपाय नहीं किए जाते हैं, तब तक काले धन की समस्या हल नहीं हो सकती। काले धन की समस्या को, सख्त दंड प्रावधानों और मुद्रा के अवमूल्यन के साथ निपटा जा सकता हैं । भ्रष्टाचार की समस्या को खत्म करने और भारतीय अर्थव्यवस्था से कला धन समाप्त करने के लिए भारत सरकार ने विमुद्रीकरण और डिजिटलीकरण जैसे दो प्रमुख कदम उठाए हैं पर इनका सफल होना आम नागरिक पर निर्भर करता हैं.

हालांकि भ्रष्टाचार और काला धन मुक्त भारत एक सपना लगता है लेकिन सरकार और आम लोगों के सामूहिक प्रयासों के साथ इस सपने को हासिल किया जा सकता है। भ्रष्टाचार और काले धन की पकड़ को तोड़ने के लिए हमें समय पर अपने करो का भुगतान करना होगा, रिश्वत के खिलाफ लड़ने का प्रण करना होगा, गैरकानूनी गतिविधियों जैसे कि यातायात नियमों या कर चोरी में शामिल न हो, अपने दस्तावेज़ अद्यतन करें ताकि आपको किसी भी परिस्थिति में अधिकारियों से अनुरोध या रिश्वत देने की आवश्यकता न हो। दूसरी तरफ सरकार भ्रष्ट अधिकारियों, नेताओं और काला बाज़ारी करने वालों को दंडित करने के लिए मजबूत कानून बना रही है और मजबूती से लागू भी कर रही है। कड़े आयकर कानून, रियल एस्टेट लेनदेन की निगरानी, सरल नियम और प्रक्रिया से हम भारत से भ्रष्टाचार और काले धन का उन्मूलन कर सकते हैं।

भ्रष्टाचार, काला धन, नकली नोट और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हम सभी को ईमानदारी से योगदान देना है, चाहे कितनी भी समस्याएं आये हमें सामना करना होगा, याद रखें कि हम अपनी भविष्य की पीढ़ी को भ्रष्टाचार मुक्त राष्ट्र देने का प्रयास कर रहे हैं जो हमारी तरफ से उनके लिए सबसे अच्छा उपहार हो सकता है।

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