Essay on visit to a Fair in Hindi – मेले की सैर पर निबंध

भारत में कई मेले और त्यौहार पूरे वर्ष मनाए जाते हैं और इन मेलों में जाना हमेशा ही मनोरंजक एवं मजेदार होता है। मेले कई प्रकार के होते हैं, कुछ मेले ७ से १० दिन तक चलते है वही कुछ सिर्फ एक या दो दिनों के लिए ही लगाए जातें हैं. हमारे यहाँ प्रत्येक उत्सव व विशेष दिन का जश्न मानाने के लिए मेले का आयोजन किया जाता हैं.

रविवार को मैं अपने कुछ दोस्तों के साथ सूरजकुंड मेले गया, जो प्रत्येक वर्ष सूरजकुंड मैदान , जिला फरीदाबाद में लगाया जाता है। यह मेला 1 फरवरी से 17 फरवरी तक चलने वाला एक वार्षिक मेला है, जिसमें भारत की समृद्ध संस्कृति, विरासत और कुछ अद्भुत शिल्प कार्यों को प्रदर्शित किया जाता है। जैसा कि तय किया गया था हम सुबह ही मेले में पहुँच गए थे, इसलिए हमारे पास इसका आनंद लेने के लिए पर्याप्त समय था। मेला मैदान में भारी भीड़ थी। केवल भारतीय ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के पर्यटक इस अनोखे मेले में आते हैं क्योंकि यह भारत के हस्तशिल्प, हथकरघा और संस्कृति की समृद्धि और विविधता को दर्शाता है, और यह दुनिया का सबसे बड़ा शिल्प मेला भी है।

मेले में हर कही रौनक थी. हस्तशिल्प , दिन-प्रतिदिन की काम आने वाली चीजों और स्वादिष्ट भोजन आदि की दुकानों को अच्छी तरह से सजाया गया था और सभी आयु -वर्ग के लोग इनका मज़ा ले रहे थे । हर कोई अपनी धुन में मगन था व अपनी पसंद की चीजें करने में व्यस्त दिखता था । कुछ सुंदर हस्तशिल्प वस्तुओं को खरीद रहे थे , कुछ स्वादिष्ट भोजन का आनंद ले रहे थे, जबकि बच्चे हाथी व ऊँट की सवारी के मजे ले रहे थे तो वही कुछ सेल्फी क्लिक करने में व्यस्त थे । मेले में हर जगह चहलपहल थी।

सूरजकुंड मेले में सुरक्षा के भी पुरे इंतजाम थे. सीसीटीवी कैमरों के साथ साथ नाइट विजन कैमरों की भी मदद निगरानी रखने के लिए ली जा रही थी और किसी भी अप्रिय घटना या दुर्घटना को रोकने के लिए मेला परिसर के भीतर कई सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था, जिससे मेले में घूमना पूर्णतः सुरक्षित लग रहा था । गोल्फ कार्ट और बैटरी संचालित रिक्शा वरिष्ठ नागरिकों के लिए अनुरोध पर उपलब्ध थे ताकि वे भी मेले का स्वतंत्र रूप से आनंद ले सकें।

हम लगभग हर स्टॉल पर गए लेकिन एक दिन में पूरा मेला देखना वास्तव में बहुत मुश्किल था । हमने स्वादिष्ट भोजन का आनंद लिया और बहुत से स्मृति चिन्ह जैसे कि मग, चाबी के छल्ले, छाता, फ्रिज मैग्नेट, कोस्टर और सजावटी प्लेटें आदि उचित दामों पर अपने व अपने मित्रों व परिवार के लिए भेंटस्वरूप ख़रीदे। पूरा मेला गतिविधियों से भरा था। कई सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसे लोक नृत्य, कठपुतली शो आदि भी आयोजित किए गए जो वास्तव में बहुत मनोरंजक थे.

शाम को मेला समाप्त हो गया। लोगों ने अपने घरों को लौटना शुरू कर दिया था इसलिए हम भी कुछ यादों और अद्भुत अनुभवों के साथ घर की ओर वापिस लौट पड़े. मेले , निसंदेह , हमारे देश की संस्कृति के बारे में जानने के लिए एक अच्छा स्रोत है और जब भी हमारे पास उपयुक्त समय हो, तो हमें मेला देखने अवश्य जाना चाहिए।

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